प्रकृति से ही इंसान है, और इंसान से ही प्रकृति पूरी होती है।
यह वाक्य केवल एक दार्शनिक कथन नहीं, बल्कि एक जीवंत सत्य है। हमारा शरीर मिट्टी से बना है, हमारी सांस हवा से चलती है, हमारा खून पानी की तरह बहता है और हमारी ऊर्जा सूर्य से आती है। हम प्रकृति के बाहर नहीं, बल्कि उसके भीतर ही बसते हैं।
प्रकृति से ही इंसान है, और इंसान से ही प्रकृति पूरी होती है। Read More »







